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जनवरी, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जिंदगी - जीने का नाम है (5)

अगली सुबह शुक्रवार का दिन। सभी उठ चुके हैं लता किचन में खाना बना रही है। रिया, रुद्रांश और सुमित तैयार होकर नाश्ता कर रहे हैं। रोहित भी उठकर बाहर आया अक्सर 9-10 बजे उठने वाला रोहित, आज 7:00 बजे ही उठ गया था "अरे रोहित ! आज सुबह-सुबह उठ गया।" लता ने किचन से निकलते हुए कहा "हां मॉम, वो इंटरव्यू के लिए जाना है इसलिए।" "तो फिर नहाकर तैयार हो, मैं खाना लगाती देती हूं।" "जी अभी थोड़ी देर में तैयार हो जाऊंगा।"कहते हुए रोहित रिया और रुद्राक्ष की ओर बढ़ गया, जो डाइनिंग टेबल पर नास्ता कर रहे थे। "गुड मॉर्निंग भैया" "गुड मॉर्निंग बाबू" रोहित ने रिया को जवाब देते हुए कहा "क्या बात है रोहित ? आज इतनी जल्दी" सुमित ने खाना खाते हुए पूछा "जी पापा, आज वह इंटरव्यू के लिए जाना है इसलिए।" "इंटरव्यू ? क्यों मास्टर्स में एडमिशन नहीं लेना क्या ?" "लेना है पापा, पर मैं मास्टर्स ओपन स्कूल से करना चाहता हूं।" "तू खुद समझदार है जैसा तुझे ठीक लगे।" "जी, आप चिंता मत कीजिए। मेरी पढ़ाई जारी रहेगी।...

जिंदगी - जीने का नाम है (4)

एक घंटे बाद रोहित नहाकर बाहर आया और बोला "मॉम खाना" "लाती हूं" किचन से लता ने आवाज लगाई और रोहित कमरे में चला गया। कुछ समय बाद रोहित ने खाना खाया और फिर बाहर आकर टहलने लगा। जब वह बोर होने लगा तो छत पर चला गया कुछ वक्त धूप में बैठे फोन चलाते - चलाते वह बोर हो गया और उसे नींद आने लगी तो वो नीचे आकर सो गया। नींद के बाद जब रोहित उठा तो उसने फोन देखा शाम के 8:00 बज गए थे। मतलब रोहित पिछले 9 घंटों से सो रहा था। हाथ मुंह धोकर वह बाहर गया। बाहर सभी अपने- अपने कामों में व्यस्त थे। "क्या बात है रोहित इतने टाइम तक सो रहा था, तबीयत तो ठीक है ? लता ने पूछा "हां मॉम सब ठीक है, वो तो बस ऐसे ही" "भैया मेरे स्कूल में यह सभी डाक्यूमेंट्स जमा करवाने हैं। आप करवा देंगे ?" रिया ने एक लिस्ट रोहित को पकड़ाते हुए कहा "बाकी सब तो मिल जाएंगे पर ये एक डॉक्यूमेंट तैयार होने में टाइम लगेगा। कब तक लास्ट डेट है ?"लिस्ट को दिखाते हुए रोहित ने पूछा "लास्ट डेट तो बताई नहीं है पर आप जल्दी ही करवा देना।" रिया ने कहा और रुद्रांश की तरफ भागी जो वही टेबल पर पा...

जिंदगी - जीने का नाम है (3)

खाना खाने के बाद रोहित कमरे से बाहर आया‌ बाहर सबको लूडो खेलता देख उसने पूछा  "बड़े मजे हो रहे हैं स्कूल नहीं गए आज ?" "नहीं आज तो सेकंड सैटरडे है तो छुट्टी है।" रुद्रांश ने रोहित को देखते हुए कहा (रुद्रांश रोहित का छोटा भाई ) फिर सबसे छोटी रिया ने कहा "भैया आओ आप भी खेलो ना हमारे साथ" "तुम खेलो मैं थोड़ा धूप लेने छत पर जा रहा हूं।" अपने एअरबड्स लगाता हुआ रोहित सीढ़ियों की ओर बढ़ गया। छत पर कुर्सी लगाए बैठा रोहित बड़े आराम से गाने सुन रहा था तभी उसका फोन बजा। रोहित ने बड्स से ही कॉल पिक किया। "हेलो" "हां भाई कैसे हो ?" सामने से रोहित के साथ पहले काम करने वाले शुभम की आवाज आई। (शुभम एक 22 साल का सीधा समझदार लड़का जो सिर्फ काम से काम रहता है बहुत कम बात करने वाला होते हुए भी जिससे उसकी अच्छी दोस्ती हो गई थी।) "मैं बढ़िया भाई और बताओ क्या चल रहा है ?" रोहित ने आवाज पहचानते हुए कहा "बस वही रोज का काम, मैंने सुना आपने जॉब छोड़ दी।" "जी हां" "क्यों ? क्या हुआ ? कोई बात हुई क्या ? "नहीं कुछ खास ...

जिंदगी - जीने का नाम है (2)

"ये लड़का भी ना दिन-पे- दिन आलसी और नालायक होता जा रहा है। रिया जरा देखना आज 10:00 बजने वाले हैं और यह उठा भी नहीं । ऑफिस नहीं जाना क्या इसे।"लता ने कहा "जी मम्मी, अभी देखती हूं।" कहते हुए रिया रोहित के कमरे की तरफ बढ़ गई। खट-खट दरवाजों को पीटते हुए रिया कमरे में आई और धीरे से फुसफुसाते हुए "मुझे भैया को आराम से उठाना पड़ेगा वरना भैया गुस्सा हो गए तो सुबह-सुबह डांट सुननी पड़ेगी और पिटाई भी हो सकती है।" यह बड़बड़ाई और आराम से रोहित के मुंह पर से रजाई हटाते हुए कहा  "भैया उठ जाओ ! मम्मी बुला रहीं हैं। ऑफिस के लिए देर हो जाएगी, फिर जल्दबाजी करोगे।" "कोई बात नहीं देखी जाएगी!" कहते हुए रोहित ने दोबारा मुंह ढक लिया। रिया ने जैसे ही दोबारा रजाई हटाए तो रोहित ने के पास का एक तकिया उसके मुंह पर दे मारा फिर क्या रिया ने भी रोहित की पूरी रजाई खींच ली और वही तकिया उसके मुंह पर दे मारा दोनों आपस में तकिया के साथ लड़ने लगे और तभी लता भी गर्म पानी लेकर कमरे में आ गई। "यह सुबह-सुबह फिर तुम दोनों फिर शुरू हो गए।" लता की आवाज सुनते ही रोहित अपन...

कुछ अपनी - 3

 हेलो फ्रेंड्स, मैं अंकित और आगे की अपनी इस कहानी को मैं आप तक पहुचाऊंगा। अब तक की कहानी में हमने देखा कि कैसे मेरी कॉलेज लाइफ एक अच्छे अनुभव के साथ शुरु हुई और अब मुझे एक ऐसी समस्या का सामना करना है जो मेरी पूरी कॉलेज लाइफ को प्रभावित कर सकती है। तो वो समस्या मेरे सामने एक सहपाठी महेश कुमार के रूप में आयी जो एक गुरुकुल से पढ़े हुए विद्वान थे। परन्तु कुछ ग़लतफ़हमियों के कारण हम दोनों में कटुता आ गयी थी जिसके कारण मैं काफ़ी परेशान हो गया था। यह समस्या इतनी बढ़ गयी कि मैंने कॉलेज बदलने का भी प्रयास किया परन्तु अधिक ज्ञान ना होने के कारण असफल रहा पर अचानक दो हफ़्तों के बाद मुझे पता चला कि मिथिलेश भाई ने कॉलेज बदल लिया है और उसका कारण मैं नहीं। बल्कि वह यहाँ की शिक्षण पद्धति से संतुष्ट नहीं थे इसलिए उन्होंने ऐसा किया। और इन्ही सब के बीच विभाग द्वारा नए छात्रों के स्वागत स्वरुप एक आयोजन किया गया- "फ्रेशर्स पार्टी"। इस उत्सव में विभाग के तीनो वर्षों के विद्यार्थी उपस्थित थे और प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए विशेष टास्क नियोजित किये गये थे जिसमे प्रत्येक विद्यार्थी को मंच पर जा...

कुछ अपनी- 2

हे लो फ्रेंड्स, कल हमने देखा कैसे अंकित को जब कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। तो उसे एक अंकल जी मिले जो उसके साथ एक रिक्शे में बैठ कर चल दिए हैं। तो क्या अंकल जी उसे सही रास्ता बताएँगे या बात कुछ और ही है आखिर एक राह चलते व्यक्ति ने उसकी मदद क्यों की ? रिक्शे के चलते ही एक सन्नाटा छा गया। तभी इस चुप्पी को तोड़ते हुये अंकल जी बोले- "बेटा आपने वहां नया दाखिला लिया है ?" "जी !" "बेटा, मेरा नाम कमल है और ये मेरा मोबाइल न. , मलका गंज में मेरी एक छोटी सी किराने की दूकान है और कुछ कमरे भी हैं जिन्हें हम किराए पर देते हैं। कोई लेना चाहे तो बताना।" "जी जरूर"   "अच्छा ! चलो आगे से आपको रिक्शा बदलना है। आ  जाओ इस रिक्शे में बैठो।" "भैया इन्हें हंसराज कॉलेज पे उतार देना।" उन्होंने रिक्शेवाले से कहा। "और बेटा ! आपको यहाँ कोई भी समस्या हो आप मुझे बे-झिझक कॉल कर सकते हो।" "थैंक यू ! अंकल जी" कहते हुए अंकित रिक्शे में बैठ गया। और अंकल जी मुस्कुराते हुए एक गली की ओर चल पड़े। और फिर इस रिक्शे ने भी रफ़्तार भरी एक ऐसी गली ह...

कुछ अपनी(1)

भोर  की बेला, पूरा आसमान लालिमा से भरा हुआ, माहौल शांत है और पूरे मोहल्ले में सन्नाटा छाया है। पर अभी भी एक घर में अशांति कायम है। ये घर है अंकित का।                अंकित एक सीधा-साधा होनहार  लड़का, पढ़ने में तेज और सीखने को हमेशा तैयार। तो मामला ये है कि आज जनाब के कॉलेज का पहला दिन है। तो यह पक्षी भी सुबह से ही अपने पंख सवारे बैठा है कि बस अब उड़ान भरे। अपने उन सपनो को पूरा करने के लिए जो पिछले तीन महीनो से उसके आँखों में झलक रहें हैं ।  समय 9:00 का है जो कि एक भैया से पता चला है जो दूसरे कॉलेज में पढ़ते हैं। "मम्मी मेरी नयी वाली पेंट-शर्ट कहाँ है ?और वो काले जूते ?" "कपड़े अलमारी में हैं और जूते टेबल के नीचे होंगे।" "आरती ! मेरा बैग पैक कर दिया क्या ?" "बैग पैक करने के लिए था ही क्या? एक रजिस्टर और दो पेन बैग में डाल दिए हैं।" "राज ! ये जूते साफ़ कर दे भाई।"  "ओह! 6 बज गये अब मुझे निकलना चाहिए।" "पर बेटा अभी तो तीन घंटे हैं।" "हाँ पापा ! पर कॉलेज पहुंचने में भी तो टाइम लगेगा ना। " "कोई टाइम नहीं लगेग...

जिंदगी - जीने का नाम है (1)

एक लड़का कुछ परेशान अपने आप से बातें करते हुए चलते-चलते एक पार्क में पहुंचा और एक टेबल पर बैठा। सब अपने कामों में व्यस्त थे तभी तंदुरुस्त से बुजुर्ग हांफते हुए उसके बगल में आ बैठे। शाम का वक्त दोनों लाल पड़े आसमान को देखने लगे। तभी बुजुर्ग ने कहा "ऑफिस से आ रहे हो बेटा ? " यह सुनते ही रोहित हड़बड़ा गया उसने कहा "जी अंकल आपने कुछ कहा ? " "मैंने पूछा ऑफिस से आ रहे हो ?" "जी" "परेशान लगते हो क्या हुआ है ?" "जी नहीं ऐसे ही" "65 साल का हूं बेटा अनुभव हो गया है लोगों को पढ़ने का" "चलो यही बता दो कैसा गया दिन" ये बोलकर तो जैसे उन्होंने रोहित की भावनाओं को हवा दे दी हो। रोहित ने आज तक कई दोस्त बनाए थे पर उनमें कोई ऐसा नहीं था जो उससे यह सवाल कर सकें। "अच्छा ही था ।" एक उदास आवाज के साथ। "ओह्ह ! सब ठीक था इसलिए तुम अपना बैग उठाए ऑफिस से सीधा पार्क चले आए। मुझसे झूठ बोल रहे हो ?" रोहित ने इसका कोई उत्तर नहीं दिया बस उदासी में गर्दन झुकाए हुए बैठा रहा। "अगर चाहो तो तुम मुझे अपनी परेशानी बता सक...

02/01/2023

हर एक ग़म एक नया ग़म बना रहा है, हमें उसके बिना चैन कैसे आ रहा है ? वो था, तो भी उखड़ा-उखड़ा रहता था, आज ना होकर भी हमें क्यों भरमा रहा है ? कभी देखा था एक चांद, अमावस की रात में, वही चांद है, आज पूनम पर नजर आ रहा है। हमें तो क्या लेना इस चांद और चांदनी से, पर इसका ख्याल क्यों बार-बार सता रहा है। ये हेर-फेर, ये ख़्यालों के बवंडर, कोई बताओ ये खेल कौन खिला रहा है। मैं नहीं हूं,‌ ये मेरा कोई ग़म है, जो मेरे ही जज़्बात मुझे बता रहा है।