जिंदगी - जीने का नाम है (4)
एक घंटे बाद रोहित नहाकर बाहर आया और बोला
"मॉम खाना"
"लाती हूं" किचन से लता ने आवाज लगाई और रोहित कमरे में चला गया।
कुछ समय बाद रोहित ने खाना खाया और फिर बाहर आकर टहलने लगा। जब वह बोर होने लगा तो छत पर चला गया कुछ वक्त धूप में बैठे फोन चलाते - चलाते वह बोर हो गया और उसे नींद आने लगी तो वो नीचे आकर सो गया।
नींद के बाद जब रोहित उठा तो उसने फोन देखा शाम के 8:00 बज गए थे। मतलब रोहित पिछले 9 घंटों से सो रहा था। हाथ मुंह धोकर वह बाहर गया। बाहर सभी अपने- अपने कामों में व्यस्त थे।
"क्या बात है रोहित इतने टाइम तक सो रहा था, तबीयत तो ठीक है ? लता ने पूछा
"हां मॉम सब ठीक है, वो तो बस ऐसे ही"
"भैया मेरे स्कूल में यह सभी डाक्यूमेंट्स जमा करवाने हैं। आप करवा देंगे ?" रिया ने एक लिस्ट रोहित को पकड़ाते हुए कहा
"बाकी सब तो मिल जाएंगे पर ये एक डॉक्यूमेंट तैयार होने में टाइम लगेगा। कब तक लास्ट डेट है ?"लिस्ट को दिखाते हुए रोहित ने पूछा
"लास्ट डेट तो बताई नहीं है पर आप जल्दी ही करवा देना।" रिया ने कहा और रुद्रांश की तरफ भागी जो वही टेबल पर पापा के साथ कैरम खेल रहा था। फिर सब ने साथ बैठकर बातें की और रात का खाना खाकर सब सोने चले गए।
रोहित को दिन में सोने की वजह से नींद नहीं आ रही थी। तो उसने अपने एक फ्रेंड को मैसेज किया फिर उससे बातें करते-करते कब 11 बज गए पता ही नहीं चला। जब उसका फ्रेंड सोने चला गया तो रोहित मूवी देखने लगा। 2 मूवीज़ देखने के बाद रोहित को महसूस हुआ की उसे नींद आने लगी है और मौसम में ठंड भी बढ़ गई है। उसने जब टाइम देखा तो सुबह के 3:00 बज रहे थे और फोन में धीमी आवाज में गाना लगाकर रोहित सो गया।
अगले दिन रोहित 11:00 बजे उठा और खाना खा कर फिर सो गया। ऐसा 3 हफ्तों तक चलता रहा। इसी बीच उसे सुमित से डांट भी खानी पड़ी क्योंकि रिया के डाक्यूमेंट्स स्कूल में समय पर जमा ना होने के कारण उन्हें नोटिस भेजा गया। उसके बाद रोहित को एहसास हुआ कि उसकी आदत बिगड़ गई है। वह बस आलस और फोन में बंध कर रह गया है। इसलिए उसने फैसला लिया कि अब दिन में नहीं सोएगा। अगले ही दिन उसने अपने सभी काम निपटाने शुरू कर दिए।
दो दिन बाद जब रोहित शाम को बाहर से घर आया तो उसकी आंखों के सामने अचानक सब धुंधला होने लगा किसी तरह लड़खड़ाते हुए वह अपने कमरे में पहुंचा और सो गया। अगले दिन सुबह जब गर्म पानी लेकर लता कमरे में आई तो उन्होंने रजाई के अंदर कांपते हुए रोहित को देखा
"अरे रोहित! कांप क्यों रहा है बेटा ? ज्यादा ठंड लग रही है क्या ?"पूछते हुए लता रोहित के पास आकर बैठी
"हम्म मॉम, पता नहीं क्यों शरीर भी दर्द कर रहा है।"
"ला देखूं तो" लता ने रोहित के चेहरे से रजाई हटाकर उसका माथा छुआ तो वह बुरी तरह तप रहा था।
"अरे रोहित, तुझे तो बुखार है। रुक मैं दवा और ठंडा पानी लाती हूं पट्टी के लिए।" लता गई और जल्दी से कुछ कटे फल, खिचड़ी और दवा लेकर आई।
"ये ले पहले यह खा ले। खाली पेट दवा नुकसान कर सकती है।"
"क्या आप भी फालतू में परेशान हो रही हो। थोड़ा सा तो बुखार है, चला जाएगा।" रोहित ने उठते हुए कहा
"हां हां मुझे पता है तू मेरा बहादुर बेटा है। पर मौसम बदल रहा है,थोड़ा आराम होते ही जाकर डॉक्टर को दिखा ले।"
"हां दिखा दूंगा।"
"चल तू खा, मैं ठंडा पानी लेकर आती हूं।"
थोड़ी देर बाद लाता आई जब तक रोहित खिचड़ी खा चुका था और फल खा रहा था।
"चल अब यह दवा खा ले फिर लेट जा मैं पट्टी रख देती हूं।" पानी का ग्लास हाथ में लिए, दवा रोहित की ओर बढ़ाते हुए।
रोहित ने दवा ली और लेट गया लता ने माथे पर पट्टी रख दी। आराम मिलने पर रोहित को कब नींद आ गई उसे पता ही नहीं चला।
शाम को रोहित डॉक्टर के पास गया। वहां उसे पड़ोस के एक तरुण कल मिले। उन्होंने जब रोहित को देखा
"अरे रोहित बेटा! यहां कैसे ? सब ठीक तो है ?"
"नमस्ते अंकल जी, बस ऐसे ही थोड़ा बुखार हो गया था तो मॉम ने बोला चेकअप करा लूं।"
"हां बेटा मौसम बदल रहा है थोड़ा सेहत का ध्यान रखो।"
"आप यहां कैसे ?" रोहित ने पूछा
"वो डॉक्टर साहब के साथ कहीं जाना है तो बस उन्हीं का इंतजार कर रहा हूं।
"अच्छा" रोहित ने उनके बगल में बैठते हुए कहा।
"और क्या कर रहे हो आजकल ? बेटा तुम कॉलोनी के होनहार बच्चों में से हो तो तुमसे उम्मीद बंधी रहती है। तुम जरुर कुछ अच्छा ही करोगे।"
"जी अभी तो बस पढ़ाई चल रही है।"रोहित साफ झूठ बोल गया।
"चलो अच्छा है मेहनत करते रहो और हमारे बच्चों को भी कुछ सिखाओ।"
"जी जरूर, अच्छा चलता हूं अंकल जी मेरी बारी आ गई। रोहित उठा और डॉक्टर की केबिन की तरफ चल पड़ा डॉक्टर को दिखाने पर उन्होंने बताया कोई दिक्कत की बात नहीं है सब नॉर्मल है। रोहित जब क्लीनिक से निकला तो वह कुछ खोया खोया था क्योंकि शायद तरुण जी ने उसे उसकी पुरानी पहचान याद दिला दी थी जिसे वह भूल गया था। रोहित शुरू से पढ़ने में अच्छा था और शांत स्वभाव के साथ संस्कारी भी। इसलिए कॉलोनी के सभी माता-पिता अपने बच्चों को रोहित के जैसा बनाना चाहते थे।शायद इसलिए कॉलोनी के बच्चे भी रोहित की बात मानते थे और उससे सीखते थे। यही सब सोचते हुए रोहित ने रास्ते में सभी दोस्तों से जॉब के लिए पूछा जो जॉब करते थे या जॉब दिलवा सकते थे।
घर पहुंचने पर रोहित अपने कमरे में कॉपी लेकर बैठ गया और खुद का मूल्यांकन करने लगा। उसने अपने लाइफ के गोल्स को याद किया और उन्हें दोबारा लिखा और उन कामों की एक लिस्ट बनाई जो वह अगले दिन से करने वाला था। आज फिर रोहित ने खाना अपने कमरे में ही खाया और सो गया क्योंकि कल का दिन उसके लिए बहुत इंपॉर्टेंट दिन होने वाला है।
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