संदेश

अप्रैल, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वज़ह

26/04/2023 (11:00 PM) खुली किताब से पन्नें बिखर रहे हैं अब, वह जो उजड़े हुए थे, संवर रहें हैं अब, वो मिलना- बिछड़ना, फिर अलग होने के किस्से, सब जिंदगी के हिस्से बनकर ठहर रहें हैं अब। ना‌ वो आतीं, ना मैं टूटता बिखरता इतना, ना‌ ये पन्ने होते, ना अक्षर उभरता इतना, ना मैं जाता ना उनसे मेरा‌ मिलना होता, ना उनसे बातें होती ना मैं निखरता इतना। उनसे ना बात होती, तो नहीं कोई बात होती, ना तो कलम होती ना ही कोई शुरुआत होती, शुक्र है ! हमें भी ठुकरा दिया उसने, ये लिखना कैसे होता ? अगर वो साथ होती। बस उस एक को कुछ लफ्ज़ बताने को, कितना कुछ सुनाता गया मैं इस ज़माने को, उसकी यादें, बातें और उसका रुठना- मनाना, मैं ये सब लिख रहा हूं सिर्फ उसे भूलाने को।

तो क्या होता....

11/04/2024 कभी कभी सोचता हूं, वो अगर नादान ना होती, तो क्या होता ? वो बहकी बहकी बातों वाली, मेरी निगहबां ना होती, तो क्या होता ? सबको परेशान रखती है वो, मुझे लेकर परेशान ना होती, तो क्या होता ? वो जो इतना सुना लेती है मुझे, अगर मेरी शान ना होती, तो क्या होता ? तेजी से बदलती दुनिया में अगर, ठहरी हुई, वो एक इंसान ना‌ होती, तो क्या होता ?

ऐ ज़िन्दगी.....

11/04/2023 फिर उलझ गई, ऐ ज़िन्दगी, तू सुलझती क्यों नहीं ? मुझे दोष देती है, मुझे समझती क्यों नहीं ? कब तक दूर भागती रहेगी ? ग़मों से एक बार उलझती क्यों नहीं ? मुस्कुराते तो देखा है तुझे, तू एक बार खुलकर हंसती क्यों नहीं ? ऐ ज़िन्दगी ..... ये ग़म भी तेरे हैं, ये खुशियां भी तेरी है, इन्हें तू अपने हिसाब से, रखती क्यों नहीं ?  ऐ ज़िन्दगी .....

बड़े चेहरे ......

10/04/2023 ये लोग बड़े चेहरे रखते हैं। कभी तो भाव हल्के रखते हैं, कभी तो रंग गहरे रखते हैं। कभी मुसाफिर बन जाते हैं, तो कभी अपने डेरे रखते हैं। ये लोग ..... कभी तो खुली किताब जैसे, तो कभी राज़ गहरे रखते हैं। ये लोग ..... जो सच्चे हैं, उन पर ध्यान नहीं देते, जो झूठे हैं, उन्हें ही घेरे रखते हैं। ये लोग ..... कभी उजाले में रहना होता है पसंद, कभी तो चारों ओर अंधेरे रखते हैं। ये लोग ..... दूसरों को बोल देते हैं कुछ भी, अपने कान बहरे रखते हैं। ये लोग .....

अज़ब लोग हैं.....

23/02/2023 अजब लोग हैं, गजब की बात करते हैं, सामने हाथ बढ़ाते हैं, पीछे से घात करते हैं। अपने कल को भूल गए हैं शायद, जो हमारे कल की बात करते हैं। जिनके कारनामों से अतीत भरा है, हमारे सिर उठाने पर वो सवालात करते हैं। क्या खूब हुनर है आज, हर एक शख्स के पास, हर शख्स से अलग चेहरे में मुलाकात करते हैं। झूठ तो ऐसे कहते हैं आजकल लोग, जैसे सावन में बादल बरसात करते हैं। हर झूठ की भूमिका में वो शख्स निकलेगा, जिसकी यादों में अक्सर आप रात करते हैं। समझ नहीं आया, क्या शिकायत हैं लोगों को ? जो खुद ही दूसरों के हाथ अपने जज़्बात करते हैं।

भुला नहीं पाया...

06/01/2023 आज उसने पूछा कुछ, बता नहीं पाया, बताता तो कैसे उसे भुला नहीं पाया। ख्याल किया था कभी,  उसे भुला दूंगा, ख्याल भुला दिया पर, उसे भुला नहीं पाया। गम भुलाने को, उसका ख्याल ही काफी है, बस वो एक ख्याल ही है, जो मैं भुला नहीं पाया। कई मुद्दातों से उसे भुलाने की कोशिश की तो, ख़ुद को भुला दिया पर उसे भुला नहीं पाया। दुनिया कहती है बड़ा भुलक्कड़ हूं मैं, ये बताओ की उसे क्यों भुला नहीं पाया। क्यूं बेचैन है, थोड़ा सब्र कर राहुल, ये वक्त हैं इससे कोई, कुछ कभी, बचा नहीं पाया।