मेरा चांद.....
14/07/20 (Tue) 9:23 PM आज आसमां से मेरा चांद खो गया है, न जाने किस दिशा में जाकर सो गया है। वो जो सांवला सा बड़ा चमकदार तारा था, जो मेरे दिल को बहुत ही ज्यादा प्यारा था। बातों में बहुत कुछ सिखाया उसने, जीने का सही मतलब बताया जिसने। नटखट चांदनी आंखें सब को निहारती थी, मुझे तो रोज़ तोड़कर फिर संवारती थी। उसकी रोशनी में हमने भी लिखना सीखा था, वही तो हमारे जीने का वास्तविक तरीका था। वो जिसने खुशियों का खज़ाना दिया था, मेरी कलम को लिखने का बहाना दिया था। मेरे आसमान में सबसे करीब था वो, उसके होने का एहसास अजीब था वो। हमेशा हर वक्त गतिमान रहता था, सब जानते हुए खुद को अनजान कहता था। हां कुछ दिनों से मंद हुआ जा रहा था, लगता है कि हमसे कुछ कहना चाह रहा था। उसकी चांदनी भी मंद होती जा रही थी, तम की छाया उस पर स्वछंद छा रही थी। मुझे लगा कि मुझसे कोई अटखेली कर रहा है, ये फिर मुझसे कोई ठिठोली कर रहा है। आज अचानक फिर वह कहीं खो गया, उसके बिना आसमान भी सूना हो गया। उसके बाद चांदनी का आना नहीं हुआ तभी से आज हमारा मुस्कुराना नहीं हुआ। तारे तो हैं पर इतने करीब नहीं, शायद उसके जितने हमें अज़ीज़ नहीं। उसके ...