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हाल हैं।

ये जो हमारे हाल हैं, खूब हैं, कमाल है। पाया था जो, ठुकरा दिया, जो नहीं मिला,मलाल है। वो बड़े सवाल करता है , जो खुद भी एक सवाल है। हम बढ़े नहीं, वो रुके नहीं, गुमनाम हम, वो मिसाल हैं।   असल में कोई था ही नहीं, उसका होना‌, बस एक ख्याल है। ये यादें, ये ख़्वाब,‌ ये सपने, कुछ खास नहीं, सब बवाल है। क्यूं इतनी उलझी रहती है, ये जिंदगी है ? या जाल है ? ये जो हमारे हाल हैं, खूब हैं, कमाल है।

06/02/2023

ना खोना चाहते हो, ना पाना चाहते हो। वो आखिर क्या‌ है? जो छिपाना चाहते हो। हंसाना चाहते हो या रुलाना चाहते हो, इंसान चाहते हो या खिलौना चाहते हो। ना आब चाहते हो, ना शबाब चाहते हो, लगता है तुम तो बस ख्वाब चाहते हो। मुसाफ़िर हो ? आगे की राह चाहते हो, हमें भूल जाओ ! अगर सलाह चाहते हो।

11/12/2022

बेचैन हूं, मैं मौन हूं, एक सवाल ! मैं कौन हूं ? किसे खोजता, किस ओर हूं, पतंग हूं, या मैं डोर हूं। अंधेरा हूं या भोर हूं, परा हूं या बस छोर हूं। बेचैन हूं, मैं कौन हूं...... भक्त कहो,भगवंत कहो, आदि कहो या अंत कहो। संपूर्ण भी हूं और कण भी नहीं, मैं काल भी हूं और क्षण भी नहीं। मैं दोष भी हूं, सन्ताप भी मैं, पुण्य हूं और पाप भी मैं। मैं नाव भी हूं, पतवार भी मैं, इस पार भी मैं उस पार भी मैं। अदृश्य मान आधार हूं मैं, चल और अचल संसार हूं मैं।....