11/12/2022
बेचैन हूं, मैं मौन हूं,
एक सवाल ! मैं कौन हूं ?
किसे खोजता, किस ओर हूं,
पतंग हूं, या मैं डोर हूं।
अंधेरा हूं या भोर हूं,
परा हूं या बस छोर हूं।
बेचैन हूं, मैं कौन हूं......
भक्त कहो,भगवंत कहो,
आदि कहो या अंत कहो।
संपूर्ण भी हूं और कण भी नहीं,
मैं काल भी हूं और क्षण भी नहीं।
मैं दोष भी हूं, सन्ताप भी मैं,
पुण्य हूं और पाप भी मैं।
मैं नाव भी हूं, पतवार भी मैं,
इस पार भी मैं उस पार भी मैं।
अदृश्य मान आधार हूं मैं,
चल और अचल संसार हूं मैं।....
टिप्पणियाँ