हाल हैं।
ये जो हमारे हाल हैं, खूब हैं, कमाल है।
पाया था जो, ठुकरा दिया,
जो नहीं मिला,मलाल है।
वो बड़े सवाल करता है ,
जो खुद भी एक सवाल है।
हम बढ़े नहीं, वो रुके नहीं,
गुमनाम हम, वो मिसाल हैं।
असल में कोई था ही नहीं,
उसका होना, बस एक ख्याल है।
ये यादें, ये ख़्वाब, ये सपने,
कुछ खास नहीं, सब बवाल है।
क्यूं इतनी उलझी रहती है,
ये जिंदगी है ? या जाल है ?
ये जो हमारे हाल हैं, खूब हैं, कमाल है।
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