जवानी में हूं।

समझना चाहते हो मैं कितनी परेशानी में हूँ,

इतना समझ लो मैं जिंदगी की जवानी में हूँ।

 

यहाँ जवान होना खुद में एक मसअला है,

जो विचारों का धनी वो अर्थ का कंगला है,


जो देश का भविष्य है, उसका कोई भविष्य नहीं,

आज जैसे दृश्य हैं, कल का कोई परिदृश्य नहीं।

 

समाज चाहता है विश्व - जीत बन जाये,

परिवार की उम्मीद, घर का दीप बन जाये।

 

स्वयं चाहता है, कोई इसका मीत बन जाये,

तब भी उम्मीद है, जिदगी संगीत बन जाये।


बचपन से इसके लिए ढांचा बनाया गया,

जो इसमें ढल गया वो ही अपनाया गया।


पहले तो कहा गया अंक-संग्रहण करो,

नौकरी मांगी तो कहा शिक्षा-ग्रहण करो।

 

ज्ञान प्राप्त कर पहुंचे, तो "तुम नहीं अब लायक हो",

बालक है उत्तीर्ण वही जिसके पिता विधायक हों।

 

अब तुम ही बताओ,

पिता को विधायक कैसे बनाऊं ?

अब तो भला इसी में,

मैं बैठकर चरखा चलाऊं।

 

कुछ समय चला, फिर इसका भी उद्धार हुआ,

उद्योग आये, हुनर का अन्त्येष्टी संस्कार हुआ।

 

इतने पर भी अगर हक़ की बात उठाई,

चलेगा शासन का डंडा, मिलेगी पिटाई।

 

अब बताओ ? घर का बड़ा हूँ, ऊपर से एक लड़का,

क्या करूँ ? नेता बनकर, लगाऊं जातीय-तड़का।

 

वो भी नहीं कर सकता, वजहें कई बड़ी हैं,

नाम है "राहुल"तो आगे "कुमार" क्यों नहीं है।

 

फिर भी तुम पूछते हो -"और भाई क्या हाल है ?",

लो सुनो ! दिल में आग और हाथों में मशाल है।

 

तुम सोच रहे होगे की मैं क्यों परेशानी में हूँ,

परिवार वाले कहते है मैं भी अब जवानी में हूँ ।   ~Rahul.k


Twitter/Insta :- @Rahul_k309

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मन है.....

वेदना

ख़ुशी