वो मुझे बुलाती है।

~ 10 फ़रवरी 2021

वो दूर कहीं एक दीप्त- लौ लहर-लहर लहराती है,
वो मुझे बुलाती है - 2

अनंत आकाश ने एक पुंज देखा,
वो ऊर्जा अस्तित्व पाना चाहती है।
वो मुझे बुलाती है -2

मन के अंदर की एक बुढ़ी सी याद कोई,
दिन पे दिन जवान होती आती है।
वो मुझे बुलाती है -2

सर्व -व्याप्त जो प्रकृति है,
वही जो मुझे बनाती है।
वो मुझे बुलाती है -2

कुछ तो कारण है जो हवा,
नित मुझे जगाती है।
न जगा जो हवाओं से तो,
किरणें भी जगाने आती है ।
जागते ही मेरे कोयलें भी गीत गाती हैं।
वो सब मुझे बुलाती है -2

निरर्थक नहीं हूं मैं,यह सब वही जताती है।
वो जो मेरे अस्तित्व को छद्म भर बताती है।
वो किसे बुलाती है, वो किसे बुलाती है।

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