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आखिरी दिन

11 मई 2022 मन हो रहा है कुछ रचा जाए आज, उन रातों के सपनों से मिला जाए आज। जिसे लगता है वह जानता है मुझे उससे कुछ अनकहा-सा कहा जाए आज उल्फतें तो जिंदगी का हिस्सा ही रहीं इन उलझनों के ऊपर चला जाए आज बुलाओ महफिल जिम्मेदारों की ज़रा सब के दुख को कहा और सुना जाए आज। वो जो वक्त गुजारे थे साथ में कभी उन यादों का जाल कोई बुना जाए आज ये जो जिंदगी ने हमें दिए हैं ये दर्द इस दर्द को तसल्ली से सहा जाए आज मैं तो कहता हूं, छोड़ो महानता की बातें आओ नदी के साथ बहा जाए आज ये जो उसने तोहफे में दिया है हमें, इस दिन को आखरी की तरह जिया जाए आज।