ख़ुशी
ख़ुशी ख़ुशी नाम है एक एहसास का , और मेरे किसी एक ख़ास का। इस एहसास और उस ख़ास में, मेरे लिए कोई फ़रक नहीं, दोनों ही पसंद हैं मुझे, दोनों पे मेरा हक़ नहीं। आना और जाना, तो फ़ितरत है इनकी। इसलिए मुझे इनसे कोई कसक नहीं। कुछ यादें छोड़ जाती हैं , ये दोनों ही अक्सर। जिनकी बेताबी की, किसी को भी भनक नहीं। हिस्से में हैं जिसके उसमे शादाबी आती है, रूठ जाएँ जो किसी से तो बहुत बेताबी आती है। बड़े बदनसीब हो, अगर जो तुमसे दूर हैं ये। हम जैसे पागलो में, बहुत बड़ा सुरूर हैं ये। पास हो तो गुजरता वक़्त महसूस नहीं होता, जब दूर हो जाएँ जिंदगी ठहराव इत्तिला करती हैं। फूलों की खुशबू से जैसी वफ़ा होती हैं, उसे याद भर करने में बड़ी शिफ़ा होती है। जब वो राह में टकरा जाये, तब ख़ुशी होती है। जब खुद मे बे-खुदी हो जाये, तो ख़ुशी होती हैं। कोई बेवकूफी सी बात हो, तो ख़ुशी होती है। उदास चेहरे पे मुस्कान ला दे, वो खुशी होती है। अंतस को बाहर बुला दे, वो वजह ख़ुशी होती है। हठी...